कइसे सहि है बियोग लिरिक्स-Rajan Ji Maharaj

 

 

Kaise Sahi Hai Viyog Lyrics

 

क्या कहा वनवासियों ने प्रभु श्री राम को देखकर
 

 

कइसे सहि है बियोग,
ओह नगरी के लोग,
नगरी लोग ओह,
नगरी के लोग,
कैसे सहिये वियोग
कइसे सहि है बियोग,
ओह नगरी के लोग,
 
रवि अइसन बाँटें छवि,
केबा जे बरनी कबी,
सूरत मूरत अइसन बाटें,
कोठरी में राखे जो,
कइसे सहि है वियोग,
ओह नगरी के लोग,
 
अंग बा मुलायम अमोला,
अमोला कहा अइसन होइला,
देखी के भीतरी गई तरी के,
पनपेगा प्रेम रोग,
कइसे सहि है वियोग,
ओह नगरी के लोग,
 
 
प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी।
जनित बियोग बिपति सब नासी॥
प्रेमातुर सब लोग निहारी।
कौतुक कीन्ह कृपाल खरारी॥

छंद

जनु धेनु बालक बच्छ तजि गृहँ चरन बन परबस गईं।
दिन अंत पुर रुख स्रवत थन हुंकार करि धावत भईं॥
अति प्रेम प्रभु सब मातु भेटीं बचन मृदु बहुबिधि कहे।
गइ बिषम बिपति बियोगभव तिन्ह हरष सुख अगनित लहे॥
बहु रोग बियोगन्हि लोग हए। भवदंघ्रि निरादर के फल ए॥
भव सिंधु अगाध परे नर ते। पद पंकज प्रेम न जे करते॥
सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।
बंदि बिप्र गुर चरन प्रभु चले करि सबहि अचेत॥
निकसि बसिष्ठ द्वार भए ठाढ़े। देखे लोग बिरह दव दाढ़े॥
कहि प्रिय बचन सकल समुझाए। बिप्र बृंद रघुबीर बोलाए॥
गुर सन कहि बरषासन दीन्हे। आदर दान बिनय बस कीन्हे॥
जाचक दान मान संतोषे। मीत पुनीत प्रेम परितोषे॥
दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी॥
सब कै सार सँभार गोसाईं। करबि जनक जननी की नाईं॥
बारहिं बार जोरि जुग पानी। कहत रामु सब सन मृदु बानी॥
सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जेहि तें रहै भुआल सुखारी॥
मातु सकल मोरे बिरहँ जेहिं न होहिं दुख दीन।
सोइ उपाउ तुम्ह करेहु सब पुर जन परम प्रबीन॥
एहि बिधि राम सबहि समुझावा। गुर पद पदुम हरषि सिरु नावा॥
गनपति गौरि गिरीसु मनाई। चले असीस पाइ रघुराई॥
 
 

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