ऐसी दशा हो भगवन , जब प्राण तन से निकले लिरिक्स

ऐसी दशा हो भगवन लिरिक्स  , Aisi dasha ho bhagawan lyrics -jain bhajan


ऐसी दशा हो भगवन , जब प्राण तन से निकले…
जब प्राण तन से निकले, तेरो नाम मुख से निकले ।।


गिरिराज की हो छाया, मन में न होवे माया २
तप से हो शुद्ध काया, जब प्राण तन से निकले ।।१।। ऐसी


उर में न मान होवे, दिल एक तान होवे २
तुम चरण ध्यान होवे, जब प्राण ऐसी ।।२।। ऐसी


संसार दुःख हरण, जैन धर्म का हो सरना २
हो कर्म भरम करना, जब प्राण ऐसी ।।३।। ऐसी


तुम संग सिद्धवट हो, प्रभु आदिदेव घट हो २
गुरूदेव भी निकट हो, जब प्राण ऐसी ।।४।। ऐसी


यह दान मुझको दीजिए, इतनी दया तो कीजे- २
अरजी ‘तिलक’ की लीजे, जब प्राण ।।५।। ऐसी

Aisi dasha ho Bhagwan, jab pran tan se nikle  lyrics 

Aisi dasha ho Bhagwan, jab pran tan se nikle…
Jab pran tan se nikle, tero naam mukh se nikle.।।


Giriraj ki ho chhaya, man mein na hove maya 2
Tap se ho shuddh kaya, jab pran tan se nikle.।।1।। Aisi



Ur mein na maan hove, dil ek taan hove 2
Tum charan dhyaan hove, jab pran aisi.।।2।। Aisi



Sansar dukh haran, Jain dharma ka ho sarna 2
Ho karma bhram karna, jab pran aisi.।।3।। Aisi


Tum sang Siddhavat ho, Prabhu aadidev ghat ho 2
Gurudev bhi nikat ho, jab pran aisi.।।4।। Aisi


Yeh daan mujhko dijiye, itni daya to kijiye- 2
Arji hamari lijiye, jab pran.।।5।। Aisi”

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